Karva Chauth Vrat Katha

Karva Chauth Vrat Katha – करवां चौथ कथा

करवां चौथ कथा – विधि -सामग्री (Karva Chauth Vrat Katha)


रोली , मोली , पताशा ,चावल , गेहू , करवां , पानी का कलश ,लाल कपड़ा ,चाँदी की अँगूठी एक ब्लाउज पीस  ।

पूजा – Karva Chauth Vrat Katha

 कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है

यह व्रत सुहागिन महिलाए अपने पति की लम्बी आयु व स्वस्थ जीवन के लिए करती है ।


इस दिन एक करवां या गिलास लेकर उसमें चावल भरे , उसमे एक सिक्का व एक पताशा डाले व लाल कपड़े से बांध दे।

कहानी सुनने के लिए मिट्टी से चार कोण का चोका लगाये ,चारो कोणों पर रोली से बिंदी लगाये । 
बीच मिट्टी या सुपारी से गणेशजी बनाकर रखे और रोली ,मोली व चावल से गणेशजी की पूजा करे ।

अब चोके के ऊपर करवां रखे उसपर ब्लाउज पीस रखे ,

पानी का कलश ,पताशा व चाँदी की अँगूठी रखे । अपने हाथ में चार गेहू के दाने लेकर कथा सुने । 


जब चौथ की कथा सुनने के बाद जो चार गेहू के दाने है

उसे तो रात में चाँद को अर्ग देने के लिए रख ले व दुसरे चार दाने लेकर गणेशजी की कहानी सुने

और उसके बाद सूर्य को अर्ग दे जो चाँदी की अँगूठी हमने पूजा में रखी थी

उसे भी अर्ग देते समय हाथ में ले लेवे । रात में चंद्रोदय होने पर जो गेहू के दाने रखे है उससे अर्ग दे व भोग लगाये ।

करवां और ब्लाउज पीस अपनी सास या ननद को दे उसके बाद अपना व्रत खोले ।


कथा – (Karva Chauth Vrat Katha)


करवां चौथ कथा – सात भाई थे उनके एक बहन थी ।

सभी भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे और हमेशा उसके साथ ही खाना खाते थे ।

जब बहन की शादी हो गई तो बहन ने करवां चौथ का व्रत किया ।

सभी भाई शाम को खाना खाने बैठे तो अपनी बहन को खाने की लिए बुलाया।

 तब बहन ने कहा कि “आज मेरे चौथ माता का व्रत है ”

तब भाइयो ने सोचा की चाँद पता नही कब तक उदय होगा अपनी बहन तो भूखी है

उन सबने उपाय सोचा और पहाड़ पर जाकर आग जलाई और उसके आगे चालनी लगाकर चाँद बना दिया

और बोले कि “बहन चाँद उग आया “वह अपनी भाभियों से बोली कि “चाँद उग आया ” तो भाभियां बोली कि ” ये चाँद आप के लिए उगा है

वह भोली थी नकली चाँद के अर्ग देकर भाइयो के साथ खाना खाने बैठ गई ।


उसने जैसे ही पहला ग्रास तोडा तो उसमे बाल आ गया ,

दूसरा तोड़ा इतने में उसके ससुराल से बुलावा आ गया की लड़की को तुरंत ससुराल भेजो ।


जब माँ ने बेटी को विदा करने के लिए कपड़ो का बक्सा खोला

तो उसमे भी सबसे पहले काला कपड़ा ही निकला तब माँ बहुत डर गई ।


उसने अपनी बेटी को एक चाँदी का सिक्का देते हुए कहा कि “तुझे रास्ते में जो भी मिले उसके पैर छूती जाना और जो तुझे सुहागन होने का आशीर्वाद दे उसे ये सिक्का दे देना और अपने पल्लू पर गांठ बांध लेना “।

वो पुरे रास्ते ऐसा ही करती गई पर किसी ने उसे सुहागन होने का आशीर्वाद नही दिया । 


जब वह अपने ससुराल पहुचीं तो बाहर उसकी जेठुती खेल रही थी

उसने उसके पैर छुए तो उसने सदा सुहागन का आशीर्वाद दिया

तो उसने सिक्का जेठुती को दिया और पल्लू पर गांठ बांध ली ।जब घर के अन्दर गई तो देखा की उसका पति मरा पड़ा है


जब उसके पति को जलाने के लिए ले जाने लगे तो उसने नही ले जाने दिया । तब सबने कहा कि “गाँव में लाश नही रहने देगे ”

तो गाँव के बाहर एक झोपडी बना दी वह उसमे रहने लगी

और अपने पति की सेवा करने लगी । रोज घर से बच्चे उसे खाना दे जाते ।


कुछ समय बाद माघ की चौथ आई तो उसने व्रत किया ।

रात को चौथ माता गाजती गरजती आई तो उसने माता के पैर पकड़ लिए ।

माता पैर छुड़ाने लगी बोली ” सात भाइयो की बहन घनी भूखी मेरे पैर छोड़ “।

जब उसने पैर नही छोड़े तो चौथ माता बोली कि ” मैं  कुछ नही कर सकती मेरे से बड़ी बैशाख की चौथ आएगी

उसके पैर पकड़ना । कुछ समय बाद बैशाख की चौथ आई

तो उसने कहा कि “मैं कुछ नही कर सकती मेरे से बड़ी भादवे की चौथ आएगी उसके पैर पकड़ना ।

जब भादवे की चौथ आई

तो उसने भी यही कहा कि “मैं कुछ नही कर सकती मेरे से बड़ी कार्तिक चौथ है

वो ही तेरे पति को जीवन दे सकती है

लेकिन वो तेरे से सुहाग का सामान मांगेगी तो तू वो सब तैयार रखना लेकिन मैंने  तुझे ये सब बताया है ऐसा मत कहना “। जब कार्तिक चौथ आई तो उसने अपने पति के लिए व्रत रखा । रात को चौथ माता आई तो उसने पैर पकड़ लिए

तब माता बोली “सात भाइयो की लाड़ली बहन घणी  भूखी , घणी तिसाई ,पापिनी मेरे पैर छोड़ “। 


तब वो बोली कि “माता मेरे से भूल हो गई मुझे माफ कर दो ,और मेरे पति को जीवन दान दो “।

जब उसने माता के पैर नही छोड़े तो माता बोली कि “ठीक है जो सामान मैं मांगू वो मुझे लाकर दे “। 
माता ने जो सामान माँगा वो उसने लाकर दे दिया ।

तब चौथ माता बोली कि

“तुझे ये सब किसने बताया “। वो बोली कि ” माता मैं इस जंगल में अकेली रहती हूँ

मुझे ये सब बताने यहाँ कौन आएगा “। चौथ माता ने माँग में से सिंदूर लिया,

आँख में से काजल व चिटली अंगुली से मेहँदी निकालकर उसके पति के छिटा तो उसका पति जीवित हो गया ।

माता ने उसके पति को जीवित कर दिया और सदा सुहागन का आशीर्वाद दिया ।


सुबह बच्चे जब खाना लेकर आये ,तो अपने चाचा को जीवित पाया । दौडकर घर गये और सबको बताया कि “चाचा जीवित हो गए “।

सब लोग वहा गए तो देखा की बच्चे सच कह रहे है । 


अपने बेटे को जीवित देखकर सास बहु के पैर पड़ने लगी तो बहु बोली “सासुजी आप ये क्या कर रही है

मैंने कुछ नहीं किया ये तो चौथ माता ने किया है ” ।

हे चौथ माता जैसे उसको सुहाग दिया वैसे सभी को देना । Karva Chauth Vrat Katha

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